About Me

My photo
Educationist,Psychologist,Author,Trainer and Writer

Wednesday, December 8, 2010

Untitled

मैं जिस राह पर भटक रही हूँ
तुम कैसे उसी पर गम हुए?
शायद पहले से बैठे ठे यहाँ
रहगुज़र की तलाश में...

जब तुम्हारा साथ मिला
तस्सली हुई एक घडी
जब मन कुछ खुसफुसाये
रूह ने साँस ली

फिर नज़र आया रास्ता
सामने था जो इंतज़ार में
मुश्किल थी की दो थी सड़कें
और दो थे हम
....कितना आसान  था अपना अपना
रास्ता पकड़ लेना

चुन लिया है मैंने वो एक
कुछ टेडा मेडा है
कुछ डर है सफ़र का
पर अब भटकने की आदत पड़ गयी है
इस राह पर तुम्हे भटकने को कैसे कहूँ
तुम भी जानते हो,ये सफ़र है तनहा
तभी है इसमें मज़ा
नहीं दे सकते हम एक दूजे को सहारा

मुझे क्या मालुम मेरी मस्जिद है कहाँ
तुम्हारा हाथ पकड़ कर
कभी नज़र आती है,
कभी नहीं....

8 comments:

  1. जिंदगी में यूं ही मोड़ आते है और आते रहेंगे
    हर मोड़ पर दो रास्ते मिलते है और मिलते रहेंगे
    हमे यूं ही तनहा करते रहेंगे ........ पर हमे चलते जाना है
    तुम्हारी इस अभिव्यक्ति और रचना ने निःशब्द कर दिया है ...
    यह रचना हर किसी के बीते पलों को झंकृत कर देगी ... कहीं न कही

    ReplyDelete
  2. par hame chalte jana hai...jeevan ki sachchai!Dhanyawad!

    ReplyDelete
  3. कुछ डर है सफ़र का
    पर अब भटकने की आदत पड़ गयी है
    इस राह पर तुम्हे भटकने को कैसे कहूँ
    xxxxxxxxxxxxxxx
    मानसिक अंतर द्वन्द की अभिव्यक्ति ...पर जीवन का सफ़र ऐसा ही चलता है ....आपकी कविता की क्या तारीफ करूँ ....धन्यवाद

    ReplyDelete
  4. कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...
    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

    ReplyDelete
  5. प्रशंसनीय प्रस्तुति - नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
    मुझे क्या मालुम मेरी मस्जिद (मंजिल)है कहाँ

    ReplyDelete
  6. काबिलेतारीफ़ है प्रस्तुति ।
    आपको दिल से बधाई ।

    ReplyDelete
  7. आप अपने ब्लाग की सेटिंग मे(कमेंट ) शब्द पुष्टिकरण ।
    word veryfication पर नो no पर
    टिक लगाकर सेटिंग को सेव कर दें । टिप्प्णी
    देने में झन्झट होता है । अगर न समझ पायें
    तो rajeevkumar230969@yahoo.com
    पर मेल कर देना ।
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

    ReplyDelete
  8. Thank you-Kewal,Rakesh and Rajeev!
    Since i am new to blogging,i'm still learning how to manage it...have removed word verification.

    Its wonderful to meet so many creative people!

    ReplyDelete