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Friday, January 21, 2011

ek wo...

एक पल वो था
जब तुम्हारी छवि ने छुआ था
पता नहीं चल मुझे

एक धड़कन वो थी
जब तुमने ख़ामोशी से पुकारा था
कुछ हुआ था मुझे

एक बहार वो थी
जब तुमने प्यार से छुआ था
प्यार हुआ था मुझे

एक अँधेरा वो था
जब तुमने हाथ पकड़ उठाया था
खुदा दिखा था मुझे

एक मोड़ वो था
जब तुमे मांग भर अपनाया था
जीवन नया मिला था मुझे

और
आज एक वो है
जब तुमने निगाहों से थामा था
सहारा मिल ही गया  मुझे 

5 comments:

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  2. छवि के छूने से लेकर .... निगाहों से थामने तक ... और .... कुछ होने से लेकर ..... सहारा देने तक ....... कितने सरल शब्दों में भावों को तुमने एक माला में पिरो दिया है ... बहुत सुन्दर कविता .... बहुत खूब

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  3. और यह एक हमेशा जिन्दगी के साथ जुड़ा रहता है ..शायद यह भी सच है ..जिन्दगी भी एक है ..आपका आभार इस सुंदर सी रचना के लिए

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  4. एक मोड़ वो था
    जब तुमे मांग भर अपनाया था
    जीवन नया मिला था मुझे

    जीवन के हर मोड़ को बखूबी अभिव्यक्त किया है आपने ...बहुत बहुत शुक्रिया

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  5. निगाहों से होते हुए....
    दिल की धड़कन में...
    बसने वाले प्यार की कहानी ...
    नीति की ज़ुबानी ...
    भई वाह !!!!
    बहुत ख़ूब !!

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