एक पल वो था
जब तुम्हारी छवि ने छुआ था
पता नहीं चल मुझे
एक धड़कन वो थी
जब तुमने ख़ामोशी से पुकारा था
कुछ हुआ था मुझे
एक बहार वो थी
जब तुमने प्यार से छुआ था
प्यार हुआ था मुझे
एक अँधेरा वो था
जब तुमने हाथ पकड़ उठाया था
खुदा दिखा था मुझे
एक मोड़ वो था
जब तुमे मांग भर अपनाया था
जीवन नया मिला था मुझे
और
आज एक वो है
जब तुमने निगाहों से थामा था
सहारा मिल ही गया मुझे

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ReplyDeleteछवि के छूने से लेकर .... निगाहों से थामने तक ... और .... कुछ होने से लेकर ..... सहारा देने तक ....... कितने सरल शब्दों में भावों को तुमने एक माला में पिरो दिया है ... बहुत सुन्दर कविता .... बहुत खूब
ReplyDeleteऔर यह एक हमेशा जिन्दगी के साथ जुड़ा रहता है ..शायद यह भी सच है ..जिन्दगी भी एक है ..आपका आभार इस सुंदर सी रचना के लिए
ReplyDeleteएक मोड़ वो था
ReplyDeleteजब तुमे मांग भर अपनाया था
जीवन नया मिला था मुझे
जीवन के हर मोड़ को बखूबी अभिव्यक्त किया है आपने ...बहुत बहुत शुक्रिया
निगाहों से होते हुए....
ReplyDeleteदिल की धड़कन में...
बसने वाले प्यार की कहानी ...
नीति की ज़ुबानी ...
भई वाह !!!!
बहुत ख़ूब !!